Dainik Haryana News

Live In Relationship : लिव इन रिलेशनशिप पर हाईकोर्ट ने दिया कपल्स को बड़ा झटका, जाने लें आप भी

Highcourt Decision : लिव इन रिलेशनशिप में आज के समय बहुत से कपल्स रहते हैं। हाल ही में एक पार्टनर ने शादी करने से मना करने पर कोर्ट में याचिका दायर की है। ऐसे में महिलाओं को हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। आइए खबर में जानते हैं। 
 
Live In Relationship : लिव इन रिलेशनशिप पर हाईकोर्ट ने दिया कपल्स को बड़ा झटका, जाने लें आप भी

Dainik Haryana News,Highcourt Decision On Live In Relationship(ब्यूरो): कोलकाता हाईकोर्ट(Kolkata High Court) ने फैसला सुनाया है कि अगर लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाला कोई अपने बच्चे और शादी के बारे में पार्टनर से बात करता है तो उसे धोखेबाज नहीं कहा जाएगा। हाईकोर्ट ने एक ऐसे केस पर फैसला सुनाया है जिसमें होटल एग्जीक्यूटिव पर अपनी लिव इन रिलेशनशिप को धोखा देने के आरोप में 10 लाख रूपये का जुर्माना लगाने का आरोप लगाया था। इस शख्स ने अपनी 11 महीने की लिव-इन पार्टनर के साथ शादी से इनकार करते हुए ब्रेकअप कर लिया था।


एक साल बाद व्यक्ति अपनी पत्नी से मिलने के लिए मुंबई गया और वहां से कोलकाता लौटने पर उसने अपने पार्टनर को बताया कि उसका इरादा बदल गया है अपनी वह अपनी पत्नी से तलाक नहीं ले रहा है। उसकी यह बात सुनने के बाद महिला को झटका लगा और उसने रेप की शिकायत दर्ज करा दी। इसे लेकर अलीपुर कोर्ट ने आरोपी पुरुष पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। इसमें से 8 लाख उसकी लिव-इन पार्टनर को और 2 लाख रुपए राजकोष में दिए जाने थे। व्यक्ति पर आरोप था कि वह 11 महीने तक अपनी लिव-इन पार्टनर के साथ रहा और फिर शादी से इनकार कर दिया।

READ ALSO :Section 144 In Delhi : दिल्ली में 29 दिनों तक धारा 144 का ऐलान, जानें वजह


होईकोर्ट ने कही ये बात :

हाईकोर्ट का कहना है कि व्यक्ति ने अपनी सच्चाई को नहीं छुपाया है, इसलिए इसे धोखा नहीं का जा सकता है। निचली अदालत ने फैसला सुनाया था और होटल एग्जीक्यूटिव ने कलकता होईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धर्थ रॉय चौधरी ने कहा है कि आईपीसी की धारा 415 के तहत धोखाधड़ी का मतलब होता है कि बेईमानी या किसी तरह का छल करना। ऐसे में धोखाधड़ी को साबित करने के लिए यह साबित करना होगा कि पुरूष ने उसके साथ शादी के झूठे वादे किए थे।

वहीं दूसरी तरफ, अगर कोई व्यक्ति अपना मैरिटल स्टेटस या बच्चे होने की बात नहीं छुपाता है, तो लिव-इन जैसे मामलों में पहले से ही एक अनिश्चितता आ जाती है। अगर महिला ने रिलेशनशिप में आने से पहले इस रिस्क को स्वीकार किया था, तो इसे पुरुष की तरफ से धोखेबाजी नहीं कहा जाएगा। अगर आरोपी ने सच्चाई नहीं छिपाई और कोई धोखा नहीं दिया, तो IPC के सेक्शन 415 में धोखेबाजी की जो परिभाषा है, वह साबित नहीं होती है।


कोलकाता हाईकोर्ट ने किया ये फैसला :

कोलकाता हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा है कि उस व्यक्ति के साथ लिव इन रिलेशनशिप में आने का फैसला सिर्फ इसलिए लिया था, क्योंकि उसने पहली Wifr से तलाक लेकर उससे शादी करने का वादा किया था। उसने अपनी तलाक को लेकर महिला को पहले ही बता दिया था और वकील ने भी इस वादे का उंल्लघन बताया है। कोर्ट का कहना है कि शादी खत्म करने का मामला वादे से जुड़ा है और महिला या पुरूष अकेले तलाक लेने में उनके पति या पत्नी की सहमति होनी जरूरी होती है। इस पर हाईकोर्ट की मुहर लगना जरूरी है। 

क्या है पूरा मामला?

READ MORE :Delhi AIMS में इस तारीख से कैश पेमेंट होगी बंद, अब इस तरीके से होगी पेमेंट

मामला 2015 का है जहां महिला ने कोलकाता के मैदान पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि साल 2014 में फरवरी में होटल में नौकरी करती थी। वहां पर वह फं्रट डेस्क मैनेजर से मिली और उसने उसके साथ फ्लर्ट किया और व उसका नंबर भी ले लिया। आरोपी ने महिला को अपनी टूटी शादी के बारे में बताया और उससे लिव इन में रहने के लिए पूछा तो महिला मान गई। महिला के माता-पिता को भी इस रिश्ते के बारे में पता था और वे चाहते थे कि उनकी बेटी जल्द शादी करके सेटल हो जाए।